मीडिया हाउस ब्यूरो

बनारस के प्रख्यात डा. लेनिन रघुवंशी एक जाने माने मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त डा. लेनिन ने दलितों और वंचित तबके के लिए जमीनी संघर्ष किया है। पुलिस यातना व बंधुवा मजदूरी के​ विरूद्ध उन्होने विपरीत परिस्थितियों में जो काम किया है वह काबिले तारीफ है। वे एक बेहतर कवि भी हैं। प्रस्तुत है उनके संग्रह से एक रचना…..

‘सराय
अरे
सबका सराय था
मुसहरो को छोड़कर
पहचान, नागरिकता के प्रमाण
से दूर
इंसानियत पर हसते
महावीर का टोला
कब बनेगा इन्सान की अस्मिता ?
इसी जिद्दोजहद में
एक दिन पंहुचा मै
गरमी के दिनों में
2001 के
उनको सुनना, महसूस करना
मुझे भी
बना रहा था
रघुवंशी से इंसान
मेरे जीवन की शुरुआत
मेरे पुनर्जन्म की स्वकथा व्यथा
बन्धुआ मजदूर से
मुक्त इंसान
पुलिस की यातना का विरोध
स्कूलों से लेकर अस्पताल तक पहुच
ये कहानी
सबको बताती है
इंन्सान, आशा, अस्मिता, इज्जत की शुरुआत
लिखी जा रही है
इंसान की सच्ची कहानिया
उनकी स्वकथा व्यथा
संघर्षो की
दासता से मुक्ति की
इंसान के पुनर्जन्म की
औराव, सकरा, अनेई, बरहीकला सहित
सैकड़ो गाँवों के दक्खिन टोलो में’

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