प्रदीप गर्ग / मीडिया हाउस ब्यूरो

हरिद्वार। वाक चातुर्य के धनी और पत्रकारिक मंच के जाने माने हस्ताक्षर रहे डा. कमल कांत बुधकर सामने कुर्सीपर बैठे अपने मित्र को बड़े गौर से सुन रहे थे। विडम्बना ही थी कि ब्रेन हैमरेज के हमले का शिकार हुए जिस शख्स को सुनने के लिए नगर का हर गणमान्यजन बैचेन रहता था तथा जिन्होने प्रेस क्लब की नींव डाली, वह श्री बुधकर आज सिर्फ सुन सकते थे। स्नेहिल भावनाओं का तूफान आज उनके चेहरे पर उमड़ घुमड़ रहा था।
22 साल बाद एक बार फिर अध्यक्ष पद की शपथ ले रहे उनके सखा डा. शिवशंकर जायसवाल जब बोलने के लिए खड़े हुए तो बीती यादों और मित्र के मनोभावों से वे अपनी भावनाओं के सैलाब को रोक नहीं पाये। उनकी आंखो में आंसू आ गये, गला रूंध गया। जो बात हजारों शब्द नहीं कह पाते, वह उन पलों में ठहर गये अनसुने शब्दों और उनके भावों ने व्यक्त कर दी।

भुलाए न भूले ये पल:
समारोह शुरू होने से ठीक पहले डा. कमलकांत बुधकर को सम्मान के साथ अगली पंक्ति में बैठाया गया था। विडम्बना कि वे आज सहारे से ही खड़े हो सकते थे। अचानक उनके गुरू और गुरूकुल में साथ अध्यापन कर चुके वयोवृद्ध साहित्यकार आचार्य विष्णुदत्त राकेश आ पहुंचे। सामने आते ही मना करने के बाद भी बुधकर पूरी ताकत समेटकर उनके सम्मान में खड़े हो गये। अभिवादन​ किया तो आचार्य श्री  राकेश ने उन्हें गले लगा लिया। पलों में ही मानो स्वर्णिम अतीत सामने आ गया और दोनों के आंखो से आंसू बह निकले। ये दृश्य देखकर वहां मौजूद पत्रकारों की आंखे भी नम हो गयी।
सम्मान, आपसी प्रेम, बौद्धिकता का भाव और भावनाओं का समुद्र। प्रेस क्लब शपथ ग्रहण समारोह के ये यादगार पल कभी भुलाए नहीं भूलेंगे। उनके लिए जो इन अनमोल पलों के साक्षी रहे।

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