मीडिया हाउस ब्यूरो

हरिद्वार। मूरत संवारने में बिगड़ती गयी, पहले से हो गया है जहां और भी खराब। देवभूमि के हालात देखकर तो यही सूरत नजर आ रही है। अवैध काम ​करिये, खूब काला धन कमाइये…गलत खुद कीजिए और थाने में सरेआम पीटिए उस शख्स को जो शिकायत लेकर गया हो। बस शर्त इतनी सी है कि आप सत्तारूढ़ पार्टी के खास हों। क्योंकि शायद यही है जीरो टॉलरेंस।

हाल ही में उत्तराखंड में कुछ घटनाओं ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। एक देश एक विधान…भ्रष्टाचार भय मुक्त समाज…समानता और न्याय की बात कहने वाले दल के लोगों ने जिस तरह से पिछले छ माह में अपना आचरण जगजाहिर किया है उसकी अपेक्षा उससे नहीं की जा सकती।
एक विधायक नेताजी ने कुंमाउ में केवल इसीलिए एक व्यक्ति की पिटाई कर दी वह भी थाने में क्योंकि वह उनकी शिकायत लेकर थानेदार के पास चला गया था। पुलिस कुछ नहीं कर पायी। यह तब हुआ जब एक दिन पहले ही राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक ने पुलिस को कानून का राज कायम करने का मंत्र दिया था। शायद यही थी जीरो टॉलरेंस।

एक व्यापारी नेताजी ने हरिद्वार में अतिक्रमण के नाम पर पुलिस को सही होते हुए भी धता बता दिया था और मरने मारने पर उतर आये थे। वे यह कर सकते थे ​क्योंकि वे सत्ताधारियों के बेहद नजदीक बताए जाते हैं। पुलिस कुछ नहीं कर पायी यहां भी। शायद यही है जीरो टॉलरेंस।

हरिद्वार में ही एक अवैध पार्किंग चलती है, पुलिस वहां उसे हटाती है तो ये धंधा चलाने वाले एक नेता पुलिस के सामने ही मुंहजोरी करते हैं। इनके लिए पुलिस के आदेश मखौल हैं। खुलेआम व्यवस्था को धमकी देते हैं। ये दे सकते हैं क्योंकि इन पर कुछ सत्ताधारियों का हाथ होने की बात है। पुलिस यहां भी दबाव में है। शायद यही है जीरो टॉलरेंस।

भाजपा ने सत्ता में आने से पहले सपा और कांग्रेस की गुंडई को जी भर के कोसा था। अब ये क्या है? पुलिस के बड़े अफसर कहते हैं कि कानून की हनक होनी चाहिए और सत्ता के दलाल अपनी हनक में प्रदेश को बरबाद करने पर आ गये हैं। क्या यही है जीरो टॉलरेंस।

गलत हो तो आप पुलिस या प्रशासन को चेताइये, आपका काम है ये कि आप नगर से लेकर प्रदेश की व्यवस्था को दुरूस्त करें। सत्ता में बैठे लोग क्या चाहते हैं कि पुलिस उनकी एजेंसी के रूप में काम करे। ऐसी जीरो टॉलरेंस का लोग क्या करेंगे कि सही काम के लिए भी उन्हें थाने में दलालों की जरूरत पड़े। पुलिस या प्रशासन को यह बताया जाये कि किस के पक्ष में काम करना है और किस के पक्ष में नहीं। यानि पुलिस क्या सिर्फ शरीफ लोगों के लिए है, क्योंकि बदमाश तो जीरो टॉलरेंस की चादर में लिपटे हैं।

प्लीज ऐसा मत करिये। संभालिए अपने कार्यकर्ताओं को अराजक और उदंडी होने से। उन्हें रोकिए ऐसा करने से। बमुश्किल इतना प्रचंड बहुमत मिलता है, उसे गंवाइये नहीं। इसका सदुपयोग कीजिए। बताइये उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अपने तमाम आनुसांगिक संगठनों का गौरवपूर्ण और सामाजिक सरोकारेां से जुड़ा इतिहास। किनारा ​कीजिए ऐसे लोगों से जो सत्ता संगठनों का इस्तेमाल अपनी निजी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने या फिर गैर कानूनी काम करने में कर रहे हैं। ये बहुमत नहीं बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है जो आपको इसीलिए मिली कि दूसरे उसे निभाने में असफल रहे। ये कहने से काम नहीं चलने वाला कि दूसरों ने भी ऐसा किया, तो…। या​द रखा जाना चाहिए कि दूसरों के गलत काम आपके द्वारा किए गए गलत कामों को कभी जायज नहीं ठहरा सकते।

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