मीडिया हाउस ब्यूरो

हरिद्वार। किसी भी सूरत में काले धन कमाने के लिए दहशत फैलाना इन दिनों नयी बात नहीं रह गयी है। एक नापाक गठजोड़ पूरे जिले की फिजां में जहर घोलने को आमादा है। ये वे लोग हैं जो मंचों पर सजते हैं और अधिकारियों के साथ सेल्फी लेकर फेसबुक पर अपने को सबसे बड़े समाज सेवी साबित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते। हाल ही में हरिद्वार के तीन पत्रकारों के साथ खनन के धंधेबाजों की आपराधिक हरकत इसी को साबित करती है। सवाल यह कि जब अन्याय के विरूद्ध आवाज उठाने वालों को कानून के प्रहरी ही प्रताड़ित करेंगे तो क्या मान लिया जाये कि हम जंगल राज में जा रहे हैं।
क्या यही है मोदी का काले धन मुक्त भारत का सच! क्या यही है जीरो टॉलरेंस?

हरिद्वार में धड़ाधड़ खनन के पट्टे खोलने की मुहिम जारी है। हर बार यह बात होती है कि वैज्ञानिक रूप से खनन होगा लेकिन होता उलट है। गंगा को खोदने वाले न नियम की परवाह करते हैं और न ही कानून की। गंगा की कोख में गहरे गढ्डे इस बात का जीता जागता सबूत हैं। कानून का पालन कराने वालों को वे कुछ नहीं समझते और बाकी उनकी खन खन में ही डूब जाते हैं। न इनको विरोध करने वालों की परवाह है और जो विरोध करते हैं तो उन्हें ये धमकाने और मारपीट तक से बाज नहीं आते।

परवाह इसीलिए नहीं कि इन लोगों को अपने पैसे पर पूरा यकीन है कि वह सबको खरीद सकता है। शायद यही वजह है कि जब ऐसे लोगों के गलत कामों पर​ शिकायत होती है तो पुलिस या प्रशासन नहीं वहां माफिया तत्वों के गुंडे पहुंच जाते हैं। मिलीभगत..गठजोड़..या फिर इत्तफाक.. इसे क्या माना जाये? हाल ही में पत्रकारों के साथ भी यही हुआ। उन्हें ऐसे ही तत्वों द्वारा बंधक बनाकर प्रताड़ित किया गया और फिर पुलिस की मदद से उन पर एफआईआर दर्ज करा दी गयी। आखिर सरकार और हनक किस की है? कानून की.. बिल्कुल नहीं। साफ है कि यहां हनक माफियाई तत्वों की है और जैसे समानांतर सरकार भी उन्हीं की। पुलिस और प्रशासन तो जैसे मूक है, जो वह कहेंगे वह तो वही करेगा!

हाल ही में कनखल और हरिद्वार में कुछ लोगों ने जब अवैध निर्माण के खिलाफ आवाज उठायी तो उन्हें रेप केस में फंसाने, मारपीट करने तथा झूठे केस बनाने की धमकी तक भिजवाई गयी। यहां तक कि इन आवाज उठाने वालों की सुपारी तक देने की बात तक कही गयी। यानि खुद गलत काम करेंगे और जब कोई विरोध करेगा तो ये लॉबी माफियाई लहजे पर उतर आयेगी। कारण साफ है कि हमारी पुलिस और प्रशासन के कुछ असरदार अधिकारियों को ऐसी लॉबी ने साध रखा है। वे विरोधियों के विरूद्ध इन्हीं का इस्तेमाल भी खूब करते हैं।

कनखल हरिद्वार में रंगदारी के चर्चित मामले हो या फिर अवैध रूप से चले रहे अनेकोनेक धंधे हों, सब जगह यही कहानी है। साफ है कि लोग अपना भविष्य सुरक्षित रखने और खूब पैसा बटोरने के लिए तीर्थनगरी का आज बरबाद कर रहे हैं। वे यहां ऐसा जहर घोलने पर आमदा हैं जिससे उनका भविष्य भी सुरक्षित रहने वाला नहीं है। सोचिये क्या हमारा कनखल या ​तीर्थनगरी ऐसी ही थी?

शांत, सुरम्य, गंगा की लहरों पर इठलाती यह नगरी यहां के ​बाशिंदो के लिए किसी पुण्य से कम नहीं। ऐसे में ऐसे महापाप के लिए इसमें वे भी बराबर के दोषी हैं जो ये सब देखकर भी मौन साधे हुए हैं। ऐसा ही रहा तो इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।

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