मीडिया हाउस ब्यूरो

हरिद्वार। देवउठनी एकादशी यानि कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी यानि देवोत्थान एकादशी कल 31 अक्टूबर को है। आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु क्षीर सागर में शयन करने चले थे और 4 महीने तक शयन के बाद कार्तिक मास की एकादशी के दिन वे जाग जायेंगे। सृष्टि के पालनहार के जागने पर इस दिन का खास महत्व होता है। इसी दिन से सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं।

नया घर, गाड़ी, नया कार्य, मुंडन या फिर शादी जैसे मांगलिक कार्य देवउठनी एकादशी से शुरू हो जाते हैं। इस दिन किसी मुहूर्त की भी आवश्यकता नहीं होती। कोई शुभ मुहूर्त निकलवाने की भी आवश्यकता नहीं है। इस​ दिन कोई भी मांगलिक कार्य कर दो वह बढ़िया रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषिय हिसाब से भी ये दिन कई प्रबल योग बनाता है।

  • ये है शुभ मुहूर्त
    हिंदुओं के लिए आज का दिन बेहद खास होता है। भगवान की पूजा का इस बार खास मुहूर्त का समय यानि 31 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 36 मिनट से लेकर 08 बजकर 47 मिनट तक व्रत धारण करने का समय माना गया है। शाम 6 बजकर 55 मिनट के बाद द्वादशी का समय है। आप इस समयानुसार ही अपनी पूजा व्रत का समय तय कर सकते हैं।

इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा की जाती है। इस दिन स्नान आदि कर भक्त को विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करना चाहिए। तथा उनका व्रत करना चाहिए। इस दिन दान का भी महत्व है सो यथासंभव जरूरतमंद व्यक्ति को दान देना उत्तम व पुण्यफलदायी होगा। इस दिन माता तुलसी का शालिग्राम जी के साथ विवाह भी किया जाता है। विवाह संस्कार वास्तव में होने वाले विवाह संस्कार और परंपरानुसार ही किए जाते हैं।

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