प्रदीप गर्ग / मीडिया हाउस ब्यूरो

हरिद्वार। नृत्य सम्पूर्ण योग के माध्यम से देश को शीर्ष पर ले जाने की मुहिम को प्रख्यात कत्थक नृत्यांगना नलिनी कमलिनी ने अपने जीवन का मिशन बना लिया है। वे कहती हैं कि नृत्य कला को बच्चों के लिए अनिवार्य विषय के रूप में रखा जाना चाहिए। कला का समावेश उनके जीवन को आध्यात्मिकता और पूर्णता से भर देगा।

पिता एयरफोर्स में अधिकारी, खुद आईआईटी इं​​जीनियरिंग की पढ़ाई और दीदी कमलिनी एमबीबीएस में साथ में बेहतर एथलीट। लेकिन आज उनकी पहचान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कत्थक से होती है। वही कत्थक जिसकी सुंदर और बेजोड़ प्रस्तुतियों से उन्होने अपनी प्रतिभा का लोहा देश और दुनिया में मनवाया। आज कत्थक उनके लिए मिशन और मिशन की तरह है। कत्थके प्रति जनून ही था कि उन्होने कैलाश मानसरोवर पर कत्थक कर विश्व रिकार्ड कायम किया था।

नलिनी कहती हैं कि गोल्ड की जगह कोई सुंदर आर्टिफिशयल चीज नहीं ले सकती, उसी तरह कत्थक नृत्य विशुद्ध सम्पूर्ण योग है। यूथ को सही दिशा देने और बेहतर उर्जा के लिए इससे बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता। वे 14 पहले हरिद्वार में बद्री केदार महोत्सव में भाग लेने आयी थी। यहां आकर उन्होने गंगा नगरी की अपनी वही यादें भी साझा की। मीडिया हाउस डॉट न्यूज से बात करते हुए कत्थक को संसार भर में पहचान दिलाने वाली ​नलिनी ने कहा कि संस्कार, कला, विद्या, ज्ञान हर एक में होता है लेकिन उसे लय ताल में सुचारू रूप से अभिव्यक्त करने का हुनर ​ईश्वर की कृपा से ही नसीब होता है।

प्रख्यात कथक नृत्यांगना नलिनी ने मीडिया हाउस डॉट न्यूज से बात करते हुए कहा कि कत्थक मेरे और दीदी कमलिनी के लिए पार्ट आॅफ लाईफ है। आध्यात्मिकता ही उन्हें साइंस से कला के क्षेत्र में ले आयी। कहा कि ईश्वर सबमें पात्र ढूंढ़ता है और हमें उसी किरदार को निभाना होता है।
उन्होने और उनकी बड़ी बहन ने 45 साल इसी में लगा दिए। साहित्य संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम किया तथा कत्थक को अपने गुरू जितेन्द्र महाराज की कृपा से विश्व भर में पहुंचाने का काम वे आज भी निर्बाध रूप से कर रही हैं। वे कहती भी हैं कि उनके जीवन का मोक्ष का मार्ग भी कत्थक में छिपा है।

कत्थक में कई कीर्तिमान स्थापित करने वाली नलिनी कमलिनी की झोली में उप्र संगीत नाटक एकाडमी अवार्ड, राष्ट्रपति अवार्ड, इंदिरा प्रियदर्शनी अवार्ड समेत 30 से अधिक अवार्ड हैं।
वे कहती हैं कि आज नलिनी कमलिनी को द्वय कत्थक नृत्यांगना के रूप में स्वीकार कर लिया गया है। इसने हम बहनों के बंधन को और मजबूत कर दिया है। कहा कि युवा पीढ़ी को कत्थक को अपनाना चाहिए क्योंकि स्वस्थ समाज और स्वस्थ जीवन पद्धति के राज तो कत्थक मेंं ही छिपे हैं।

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